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गुरुवार, 5 जुलाई 2012

(लघु emotional कथा)


  • छोटू दो कप स्पेशल चाय देना ...
    अम्मा ये लो चाय पी लो ...
    ये मै रोज़ केशवपुरम के liabrary के बाहर कहते हुए सुनता..
    मेरा मन हुआ की आखिर कौन है जो रोज़ चाय पिलाती है अम्मा को वो भी library में?
    कुछ जानने और कुछ देखने की नियत से मै तेज़ी से बाहर निकला..देखा की एक अतिसुन्दर गोरी लड़की जो गुलाबी shirt और levis की जींस में बाहर बैठी चाय पी रही है दुसरे हाथ में पावरोटी और बुट्टर लिए..
    ...
    बोले जा रही थी की अम्मा तुम इतना काम मत किया करो..(बीच बीच में अम्मा के पसीने को पोछती) अम्मा भी साथ में पावरोटी और चाय पी रही थी...अम्मा के हाथ में कपड़े का एक मोटा gloves था.
    मै मन में अनेक प्रश्न लिए बापस अपनी सीट पे जाकर पढने लगा..आज सुबह मै library जल्दी गया उन प्रश्नों की खोज में की शायद मुझे कुछ पता चले..मैंने देखा की अम्मा सड़क पे मोटा gloves पहने झाड़ू लगा रही है..motorcycle पर बैठ कर मै सब देख रहा था..
    अचानक से मेरे कान में आवाज़ आई अम्मा ये लो चाय पी लो...

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