कमरे में घुसते ही एक अजीब सा सन्नाटा था। सामने बैठी मैडमें जिनके हाथ में एक एक पर्चा था आपस में खुसुरफुसुर में मगन थी। वह सकुचाती हुई भीतर घुसी। उसने सिर और आँखें नमस्ते के अंदाज़ में झुका दीं।
एड हॉक पैनल में नाम है तुम्हारा ? (उनमें से एक ने पूछा)
लघुकथा समवाय यह समूह बनाने की जरुरत शायद इसलिए भी है कि आज जैसे कहानियों के इस दौर में लघुकथाओं पर एक संकट सा आ गया जान पड़ता है।मेरी कोशिश है कि हर वो शख्स जो अपने अनुभव को कथा खासकर लघुकथा में रूपांतरित करने का हुनर जानता हैं। वह यहाँ इस ब्लॉग पर उस अनुभव को चस्पा करें। हमें अपनी लघु कथा भेजे। हमसे संपर्क करे। लेकिन इस योजना के लिए ज़रूरी है कि आप अपनी मौलिक लघुकथाएँ हमें भेजें। हमारा ईमेल आईडी है tarunguptadu@gmail.com dr.tarundu@gmail.com Mob :- 09013458181
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रविवार, 15 जुलाई 2012
एड हॉक इंटरव्यू
कमरे में घुसते ही एक अजीब सा सन्नाटा था। सामने बैठी मैडमें जिनके हाथ में एक एक पर्चा था आपस में खुसुरफुसुर में मगन थी। वह सकुचाती हुई भीतर घुसी। उसने सिर और आँखें नमस्ते के अंदाज़ में झुका दीं।
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