रात्री के दो बज रहे थे। दिल्ली के अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रावास सहित आसपास का सारा वातावरण शात था। अचानक वातावरण की शांति को भंग करते हुए आवाज आई-
‘गार्ड साहब, गार्ड साहब गेट खोलिए। मिश्रा जी, मिश्रा जी गेट खोलिए।’
लघुकथा समवाय यह समूह बनाने की जरुरत शायद इसलिए भी है कि आज जैसे कहानियों के इस दौर में लघुकथाओं पर एक संकट सा आ गया जान पड़ता है।मेरी कोशिश है कि हर वो शख्स जो अपने अनुभव को कथा खासकर लघुकथा में रूपांतरित करने का हुनर जानता हैं। वह यहाँ इस ब्लॉग पर उस अनुभव को चस्पा करें। हमें अपनी लघु कथा भेजे। हमसे संपर्क करे। लेकिन इस योजना के लिए ज़रूरी है कि आप अपनी मौलिक लघुकथाएँ हमें भेजें। हमारा ईमेल आईडी है tarunguptadu@gmail.com dr.tarundu@gmail.com Mob :- 09013458181
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